भारत में खेती छोटे-छोटे खेतों में होती है और अक्सर बहुत ज्यादा उत्पादन नहीं होता है, लेकिन देश की 45% से ज्यादा आबादी खेती पर निर्भर है। इसलिए फर्टिलाइजर प्रोडक्शन घटने का असर ज्यादा हो सकता है।
अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से भारत का उर्वरक उत्पादन यानी फर्टिलाइजर प्रोडक्शन मार्च में करीब एक चौथाई घट गया। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, मार्च 2026 में उर्वरक उत्पादन मार्च 2025 के मुकाबले 24.6% घटा है। दरअसल उर्वरक बनाने में इस्तेमाल होने वाली नैचुरल गैस की सप्लाई मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण प्रभावित हुई है। नैचुरल गैस का इस्तेमाल यूरिया बनाने में होता है, जो भारत की खेती के लिए बेहद जरूरी खाद है।
इसके लिए भारत पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और सप्लाई पर निर्भर रहता है। जंग की वजह से होर्मुज रूट में आवाजाही लगभग बंद है। इसी रास्ते से ऊर्जा और उर्वरक से जुड़े कच्चे माल की सप्लाई होती है। होर्मुज बंद होने की वजह से खाड़ी देशों से आने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस की खेप भारत नहीं पहुंच पा रही है। भारत अपनी जरूरत की करीब 60% LNG और 40% यूरिया के लिए इन्हीं देशों पर निर्भर है। वहीं दुनिया के करीब एक-तिहाई उर्वरक भी इसी समुद्री रास्ते से गुजरते हैं।
फर्टिलाइजर प्रोडक्शन घटने के मुख्य कारण
- कच्चे माल की कमी: यूरिया बनाने के लिए नेचुरल गैस (प्राकृतिक गैस) सबसे जरूरी ‘फीडस्टॉक’ है। भारत अपनी जरूरत की काफी गैस आयात करता है, जिसकी सप्लाई युद्ध के कारण बाधित हुई है।
- होर्मुज रूट का संकट: यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहां आवाजाही बंद होने से खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे माल के जहाज भारत नहीं पहुंच पा रहे हैं।
- ऊर्जा की कीमतों में उछाल: युद्ध की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और तेल के दाम बढ़ जाते हैं। इससे उत्पादन की लागत इतनी बढ़ गई है कि कई प्लांट अपनी पूरी क्षमता पर काम नहीं कर पा रहे हैं।
- लॉजिस्टिक और बीमा लागत: युद्ध क्षेत्र के पास से गुजरने वाले जहाजों का बीमा यानी इंश्योरेंस महंगा हो गया है, जिससे माल मंगाना न केवल मुश्किल बल्कि बेहद खर्चीला हो गया है।
उर्वरक के लिए भारत की आयात पर भारी निर्भरता
- भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उपभोक्ताओं में है, लेकिन जरूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से आता है।
- देश की कुल फर्टिलाइजर जरूरत का करीब 30–35% सीधे आयात होता है।
- यूरिया में भारत आत्मनिर्भरता के करीब है, फिर भी कच्चे माल (गैस) के लिए आयात पर निर्भर है।
- डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और पोटाश जैसे उर्वरकों में 80–90% तक आयात पर निर्भरता है।
